What is Pollution 2021 प्रदूषण क्या होता है? वायु, जल, ध्वनि प्रदूषण Best Eassy

प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है, यह सिर्फ हमारे देश की ही नहीं बल्कि यह एक अंतर्राष्ट्रीय समस्या है जिसकी चपेट मे प्रथ्वी पर रहने वाले सभी जीव-जन्तु और अन्य निर्जीव पदार्थ भी आ गए है, अगर प्रदूषण को समय रहते नहीं रोका तो हमे इसकी बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है ।

प्रदूषण की समस्या तथा समाधान ( निबंध, प्रदूषण के कारण )

प्रदूषण

पर्यावरण मे व्रक्षों का भंडार,

करता है प्रथ्वी का श्र्ंगार।

जब आस-पास हरियाली होगी,

तो जीवन मे खुसियाली होगी।

प्रस्तावना :-

पर्यावरण दो शब्दो से मिलकर बना है_ परि+आवरण ।

परि का अर्ध है “चारों और”

आवरण का अर्ध है “ढका हुआ”

इसका शाब्दिक अर्ध होता है की वह वातावरण जिससे जीव-जन्तु चारों और से ढके हुये है पर्यावरण कहलाता है। इस दुनिया के सभी जेवीक तथा अजेवीक तत्व पर्यावरण मे आते है, एक तरह से कहे तो प्रकर्ति ही पर्यावरण है । मानव भी पर्यावरण का अभिन्य अंग है, पेड़-पोधे भी इसी पर्यावरण मे आते है ।

पर्यावरण प्रदूषण क्या है?

पर्यावरण Pollution मानवीय क्रियाओ से जल, वायु, मिट्टी की भोतीक, रासायनिक एवं जेवीक विशेस्ताओ में होने वाला वह अवांछनीय परिवर्तन है जो मानव, पोधों तथा अन्य जन्तुओ तथा उनके वातावरण आदि को न केवल हानि पहुचाता है बल्कि उनके अस्तित्व को भी संकट मे डाल देता है।

प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं?

मानव को आज जिस प्रकार के संकट का सामना करना पड़ रहा है,उनमे प्रमुख प्रकार है :-

वायु प्रदूषण (Vayu pradushan) Air Pollution:- 

वायु प्रदूषण

वायु प्रदूषण के कारण :-आजकल जनसंख्या के बढ़ते प्रभाव से हमारे बीच मे कही साधन आ गए है जो की दिन-रात चलते ही रहते है जिस कारण से हवा मे जहरीले गेसै मिलकर हवा को प्रदूषित कर देती है , यह वायु  मानव के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालती है, कारखानो से निकला धुआ हवा मे मिल जाता है, यह वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है, वाहनो से निकलने वाला धुआ भी वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है।

जल प्रदूषण (Jal pradushan) Water Pollution :-

आपने जल ही जीवन  है  (Water is Life ) इस लाइन को बहुत बार सुना होगा ये बिलकुल सच क्यूकी हम 1 या 2 दिन बिना पानी के रह लेंगे बाद मे तो हम लोगो को पानी पीना ही पड़ेगा अगर हम पानी नहीं पिएंगे तो इससे हमारी मोत भी हो सकती है,

कारखानो से निकलने वाले अशुद्ध जल और रासायनिक प्रदार्थ नदियो और समुद्र मे मिलकर पानी को प्रदूषित कर देता है, इस प्रदूषित जल को पीने से हम लोगो को कही गंभीर बीमारिया हो जाती है, और शहर से निकलने वाले मल-मूत्र से भी पानी गंधा होता है हमे मल-मूत्र को गड्डो मे डालना चाइये जो बाद मे खाद के रूप मे काम मे आ सके।

ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) :-

आज पूरे संसार की सबसे बड़ी समस्या बनता जा रहा है, ध्वनि प्रदूषण वह अनुपयोगी ध्वनि जिससे मानव तथा जीव-जन्तुओ को समस्या हो यानि की जब ध्वनि मानव तथा जीव-जन्तुओ पर आंतरिक दबाव डालने लगे ध्वनि प्रदूषण  कहलाती है, आज युग मे नये-नये कल-कारखानो, मोटर और हवाई जहाज ध्वनि प्रदूषण को फेलाते है,  इससे इन्सानो मे बहरापन और तनाव पेदा होता है।

मृदा प्रदूषण :-

मृदा प्रदूषण

मिट्टी में प्रदूषको के मिलने से मृदा प्रदूषण होता है, आजकल खेती मे फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए कीटनाशको का छिड़काव किया जाता है, ये कीटनाशक मृदा की उर्वरकता को खत्म कर देते है, आजकल हम यूरिया जैसे खाद को खाते है इसलिए बीमारिया बढ़ती जा रही है।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण:-

Pollution के व्यापक और सर्वोधिक कारण मानव निर्मित है, इंशान प्रकर्ति का अत्यधिक दोहन कर रहा है, इससे प्राकर्तिक संसाधनो मे कमी हो रही है, जो संसाधन बचे हुये है वो भी Pollution के मारे प्रदूषित हो रहे है ।

Pollution का मुख्य कारण कल-कारखानो से निकलने वाला जहरीला धुआ और रासायनिक पदार्थ हैं, यह धुआ वायु मे और रासायनिक पदार्थ पानी मे मिलने से दोनों प्रदूषित हो जाते है, शहरो मे बढ़ते वाहन भी Pollution का कारण है, अत्यधिक वाहनो से ट्रेफिक बढ़ता है और उनसे निकलने वाले जहरीले धूए मे बड़ोतरी होती है, जिससे वायु प्रदूषण होता है, लाउड-स्पीकर और कारखानो के सायरन से ध्वनि प्रदूषण होता है।

वृक्षो की अंधाधुंध कटाई से प्रदूषण मे बड़ोतरी हो रही है, घटते जंगलो से प्राकर्तिक संतुलन बिगड़ रहा है, ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण का मुख्य कारण वृक्षो की कटाई भी है, ज्वालामुखी, बाड़, भूकंप से जल और वायु प्रदूषित होती है, परमाणु विस्फोट परीक्षण से भी वायु प्रदूषण होता है, परमाणु परीक्षण से रेडियो एक्टिव पदार्थ हवा मे मिल जाते है।

Pollution के बुरे प्रभाव :-

पर्यावरण Pollution का पृथ्वी और मनुष्य दोनों पर ही बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है, आज ज्यादा सी ज्यादा पैसे कमाने और लाभ के लिए मनुष्य विज्ञान की मदद ले रहा है, परंतु इस चक्कर मे कई हानिकारक रसायन उत्पादो को हम हर दिन भोजन के माध्यम से खा रहे है और हर दिन प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे है।

सिर्फ भारत ही में नहीं बल्कि पूरे विश्व मे प्रकृति का यही हाल है, सबसे बड़ा सवाल बस यही है की क्या हम सही दिशा मे चल रहे है?  इसका सीधा उत्तर है नहीं क्यूकी कोई भी विनाश का रास्ता सही नहीं होता है ।

प्रदूषण के कारण कई प्रकार की बीमारियों से पूरे विश्व को जुज़ना पड़ रहा है, इसमें से कुछ बीमारिया और स्वास्थ्य से जुड़ी मुश्किले पैदा हो रही है, जैसे की टाइफाइड, डायरिया, उल्टी, लीवर मे इम्फ़ेक्सन होना, सास से जुड़ी समस्या, आंखो मे जलन, केंसर, ब्लड प्रेसर और ध्वनि प्रदूषण के कारण गर्भपात आजकल बाजार मे मिलने वाली सभी चिजे प्रदूषित हो चुकी है ।

प्रदूषण रोकने के उपाय :-

  • जो कारखाने बनाए जा चुके है उनको तो अब हटाना मुसकिल है परंतु सरकार को आगे बनाए जाने वाले कारखानों  को शहर से दूर बनाना चाहिए ।
  • एसी यंत्रे और गाड़िया बनाना चाहिए जिनमे से कम धुआ निकले जिससे वायु प्रदूषण को कम किया जा सके।
  •  जंगलो और पेड़-पोधों की कटाई को किसी भी तरह रोकना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा नए पेड़ लगाने चाहिए।
  • नदी के पानी मे कचरा फ़ेक कर उसको दूषित करने वाले लोगो को रोकना चाहिए और नदी के पानी को “सिवेज रिसायकल ट्रीटमेंट” की मदद से स्वछ करके पीना चाहिए।
  • केमिकल से बने खाद की जगह प्राकृतिक खाद का उपयोग खेती के कार्यो मे करना चाहिए ।

निष्कर्ष :-

स्वच्छता बेहतर जीवन देती है, पृथ्वी की सुंदरता बनाए रखने की ज़िम्मेदारी हमारी है, धरती को प्रदूषण मुक्त करना हमारा कर्तव्य है, प्रकृति का संतुलन बनाए रखने का दायित्व भी हमारा है, Pollution फैलाने के जिम्मेदार हम खुद है इसको कम करना भी हमारा फर्ज है।

“प्रकृति की है अब यही पुकार,

बंद करो पर्यावरण पर प्रहार”

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